Saturday, 14 February 2015

hindi homework continues


I cannot post the task cards, so please read the stories and you may do the task cards in cards.  
 
बर्फ़ क्यों गिरती है?
जब बादल का तापमान हिमांक से नीचे पहुँच जाता है तब वहाँ नन्हें-नन्हें  हिमकण बनने लगते हैं। जब ये कण बादल से नीचे की ओर गिरते हैं तो वे एक दूसरे से टकराते हैं और एक दूसरे में जुड़ जाते हैं। इस प्रकार इनका आकार बड़ा होने लगता हैं। जितने ज़्यादा हिमकण आपस में जुड़ते हैं हिमकण का आकार उतना ही बड़ा होता जाता हैं। पृथ्वी पर वे छोटे छोटे रुई के फाहों के रूप में झरने लगते हैं। इन्हें हिमपर्त कहते हैं।
ये हिमपर्त षटकोणीय होते हैं और कोई भी दो  हिमपर्त आकार में एक से नहीं होते। काले चित्र में हिमपर्त के कुछ आकार दिखाए गए हैं। हिमकण प्रकाश को प्रतिबिम्बित करते हैं, इसलिए ये सफ़ेद दिखाई देते हैं। अगर हवा का तापमान हिमांक से नीचे हो तो ये हिमकण गिरते समय पिघल जाते हैं। केवल सर्दी होने से बर्फ नहीं गिरती है। इसके लिए हवा में पानी के कण होना ज़रूरी है।
गिरी हुई बर्फ कहीं बहुत हल्की तो कहीं बहुत गहरी भी हो सकती है। क्यों कि बर्फ़ हवा से उड़ती हुई इधर-उधर जाती है और एक जगह पर इकट्ठा हो जाती है।
गिरती हुई बर्फ़ हमेशा नर्म नहीं होती। कभी कभी यह छोटे-छोटे पत्थरों के रूप में भी गिरती है। इन पत्थरों को ओले कहते हैं। इनमें बर्फ़ की कई सतहें होती हैं। अभी तक सबसे बड़ा ओला . किलो का पाया गया है।
उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ़ के पहाड़ हैं। इन पहाड़ों से बर्फ़ के बड़े बड़े टुकड़े अलग होकर तैरते हुए आगे बढ़ते हैं। इन टुकड़ों को हिमशिला कहते हैं। बर्फ़ पानी पर इसलिए तैरती है क्यों कि वह पानी से हल्की होती है।

 

 

 

 

 

समुद्र, झील, तालाब और नदियों का पानी सूरज की गर्मी से वाष्प बनकर ऊपर उठता है। इस वाष्प से बादल बनते हैं।
ये बादल जब ठंडी हवा से टकराते हैं तो इनमें रहने वाले वाष्प के कण पानी की बूँद बन जाते हैं। ठीक वैसे ही जैसे कमरे की हवा में रहने वाली वाष्प फ्रिज से निकाले गए ठंडे के कैन से टकरा कर पानी की बूँद बन जाती है।
बूँदों वाले बादल भारी होकर धरती के पास आ जाते हैं। बूँदें धरती की आकर्षण शक्ति से खिंचकर वर्षा के रूप में बरस जाती हैं। इस प्रकार धरती से बादल और बादल से धरती तक यात्रा करता हुआ पानी सदा गतिमान रहता है।
एशिया में यूरोप की तरह बारहों महीने वर्षा नहीं होती। मानसूनी हवाएँ वर्षा ऋतु लाती हैं और इसके बाद सर्दी और गर्मी की ऋतुओं में वर्षा आमतौर पर बहुत ही कम होती है। गर्मी की ऋतु के बाद लोग वर्षा ऋतु की प्रतीक्षा करते हैं। अगर वर्षा न हो तो आकाल  पड़ जाता है। खेत सूख जाते हैं और पशु मरने लगते हैं।
जब बहुत ज़्यादा वर्षा होती है तो नदियाँ अपने किनारों से बाहर आकर बहने लगती हैं और शहर में पानी भर जाता है। इसको बाढ़ कहते हैं।
वर्षा का जल साफ़ और शुद्ध होता है। इसलिए यह शुद्ध जल का सबसे अच्छा स्रोत है। भारत के चेरापूँजी नगर में विश्व की सबसे अधिक वर्षा होती है।

 

 

some more hindi homework


 Read the stories below
हवा क्यों बहती है 
http://abhivyakti-hindi.org/phulwari/jaankari/mausam/images/hawa1.jpgपृथ्वी के चारों ओर रहनेवाली हवा हमेशा चलती रहती है। गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है। जैसे ही गर्म हवा ऊपर उठती है, उसकी खाली की हुई जगह को भरने के लिए ठंडी हवा नीचे आती है। सूर्य की गरमी से धरती और समुद्र के अलग अलग हिस्से अलग अलग समय पर गरम होते हैं। और इस तरह धरती पर हवा का बहना जारी रहता है।

हवा के बड़े हिस्से को 'एअर मास' या वायु संहिति कहते हैं। यह अपने पास स्थित धरती या समुद्र के जिस हिस्से के ऊपर से गुज़रता है उसी स्थान के तापमान के अनुसार गर्म, सूखा, ठंडा या नम हो जाता है।
नाइट्रोजनhttp://abhivyakti-hindi.org/phulwari/jaankari/mausam/images/nitrogen.jpg
http://abhivyakti-hindi.org/phulwari/jaankari/mausam/images/hawa5.jpgबहुत तेज़ हवाओं को तूफ़ान कहते हैं। 

जब ये गोलाकार घूमते हुए आगे बढती हैं तो घरों की छतें उड़ जाती हैं और समुद्र में बड़ी–बड़ी लहरें उठने लगती हैं।

ऐसे तूफान आमतौर पर गर्म और नम मौसम वाले स्थान से शुरू होते हैं।

कभी कभी बहुत गर्मी पड़ती है और उमस महसूस हेती है। ऐसे में पतंग भी ठीक से नहीं उड़ती। पतंग हल्की हवा में अच्छी उड़ती है।
 
http://abhivyakti-hindi.org/phulwari/jaankari/mausam/tufan4.jpgजब नमी से भरी हुई ढेर-सी गर्म हवा तेज़ी से ऊपर की ओर उठती है तब तूफ़ान आते हैं।
तुमने तूफ़ान की शुरुआत से पहले हवा को तेज़ होते हुए देखा होगा। जब बादल को बड़े होते जाते हैं और गहरे होते हुए आसमान में अँधेरा छाने लगता है। ये तूफ़ान के लक्षण हैं।
बादलों के अंदर पानी के कण तेज़ी से घूमते हैं और आपस में टकराते हैं, जिससे बिजली पैदा होती है। बिजली पैदा होने का काम तब-तक चलता रहता है जब तक वह बड़ी-सी चिंगारी बन कर एक बादल से दूसरे बादल तक होती हुई धरती तक ज़ोरदार चमक बन कर कौंध नहीं जाती।
http://abhivyakti-hindi.org/phulwari/jaankari/mausam/tufan3.jpgबिजली में गरज और चमक एक साथ होती है। चमक पहले दिखाई देती है और गरज बाद में सुनाई देती है। ऐसा इसलिए होता है क्यों कि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से तेज़ होती है और चमक हमारे पास तक आवाज़ से पहले पहुँच जाती है।
बिजली, पानी और तूफ़ान से बचने के लिए किसी ऊँचे पेड़ के नीचे खड़े हो जाना उचित नहीं है, क्यों कि बिजली धरती पर गिरते समय अकसर किसी ऊँचे वृक्ष का सहारा ले लेती है। आसमान से गिरती हुई बिजली हमें नुकसान पहुँचा सकती है।
बिजली चमकते समय जब आकाश में इधर-उधर गुज़रती है तो आस-पास की हवा गर्म हो जाती है। यह गर्म हवा तेज़ी से फैलती है तो गड़गड़ाहट की तेज़ आवाज़ सुनाई देती है।
 

Friday, 13 February 2015

hindi hmework

Dear students I am posting one of your hindi homework. Please read the stories.


बाज की उड़ान
एक बार की बात है कि एक बाज का अंडा मुर्गी के अण्डों के बीच गया. कुछ दिनों  बाद उन अण्डों में से चूजे निकले, बाज का बच्चा भी उनमे से एक था.वो उन्ही के बीच बड़ा होने लगा. वो वही करता जो बाकी चूजे करते, मिटटी में इधर-उधर खेलता, दाना चुगता और दिन भर उन्हीकी तरह चूँ-चूँ करता. बाकी चूजों की तरह वो भी बस थोडा सा ही ऊपर उड़ पाता , और पंख फड़-फडाते हुए नीचे जाता . फिर एक दिन उसने एक बाज को खुले आकाश में उड़ते हुए देखा, बाज बड़े शान से बेधड़क उड़ रहा था. तब उसने बाकी चूजों से पूछा, कि-
इतनी उचाई पर उड़ने वाला वो शानदार पक्षी कौन है?”
तब चूजों ने कहा-” अरे वो बाज है, पक्षियों का राजा, वो बहुत ही ताकतवर और विशाल है , लेकिन तुम उसकी तरह नहीं उड़ सकते क्योंकि तुम तो एक चूजे हो!”
बाज के बच्चे ने इसे सच मान लिया और कभी वैसा बनने की कोशिश नहीं की. वो ज़िन्दगी भर चूजों की तरह रहा, और एक दिन बिना अपनी असली ताकत पहचाने ही मर गया.
 दोस्तों , हममें से बहुत से लोग  उस बाज की तरह ही अपनI Asailayat जाने बिना एक  iWtIya EaoNaI kI ज़िन्दगी जीते रहते हैं,.हम ये भूल जाते हैं कि हम आपार संभावनाओं से पूर्ण एक प्राणी हैं. हमारे लिए इस जग में कुछ भी असंभव नहीं है,पर फिर भी बस एक औसत जीवन जी के हम इतने बड़े मौके को गँवा देते हैं.
आप चूजों  की तरह मत बनिए , अपने आप पर ,अपनी काबिलियत पर भरोसा कीजिए. आप चाहे जहाँ हों, जिस परिवेश में हों, अपनी क्षमताओं को पहचानिए और आकाश की ऊँचाइयों पर उड़ कर  दिखाइए  क्योंकि यही आपकी वास्तविकता है.
 
 
 
तितली का संघर्ष
 
एक बार एक आदमी को अपने bagaIcao में टहलते हुए किसी टहनी से लटकता हुआ एक तितली का कोकून दिखाई पड़ा. अब हर रोज़ वो आदमी उसे देखने लगा , और एक दिन उसने Qyaana idया कि उस कोकून में एक छोटा सा छेद बन गया हैउस दिन वो वहीँ बैठ गया और घंटो उसे देखता रहा. उसने देखा की तितली उस खोल से बाहर निकलने की बहुत कोशिश कर रही है , पर बहुत देर तक प्रयास करने के बाद भी वो उस छेद से नहीं निकल पायी , और फिर वो बिलकुल शांत हो गयी मानो उसने हार मान ली हो.
इसलिए उस आदमी ने निश्चय किया कि वो उस तितली की मदद करेगा. उसने एक कैंची उठायी और कोकून की  iCd` को इतना बड़ा कर दिया की वो तितली आसानी से बाहर निकल सके. और यही हुआ, तितली बिना किसी और संघर्ष के आसानी से बाहर निकल आई, पर उसका शरीर सूजा हुआ था,और पंख सूखे हुए थे.
वो आदमी तितली को ये सोच कर देखता रहा कि वो किसी भी वक़्त अपने पंख फैला कर उड़ने लगेगी, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. इसके उलट बेचारी तितली कभी उड़ ही नहीं पाई और उसे अपनी बाकी की ज़िन्दगी इधर-उधर घिसटते हुए बीतानी पड़ी.
वो आदमी अपनी दया और जल्दबाजी में ये नहीं समझ पाया की दरअसल कोकून से निकलने की प्रक्रिया को प्रकृति ने इतना कठिन इसलिए बनाया है ताकि ऐसा करने से तितली के शरीर में मौजूद तरल उसके पंखों में पहुच सके और  वो छेद से बाहर निकलते ही उड़ सके.
वास्तव में कभी-कभी हमारे जीवन में संघर्ष ही वो चीज होती जिसकी हमें सचमुच आवश्यकता होती है. यदि हम बिना किसी saMGaYa- के सब कुछ पाने लगे तो हम भी एक अपंग के सामान हो जायेंगे. बिना परिश्रम और संघर्ष के हम कभी उतने मजबूत नहीं बन सकते जितना हमारी क्षमता है. इसलिए जीवन में आने वाले कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिये वो आपको कुछ ऐसा सीखा जायंगे जो आपकी ज़िन्दगी की उड़ान को saMBava बना पायेंगे.